Tuesday, May 21, 2024
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किसानों को लुभानें के लिए मोदी सरकार ने बढ़ाई रबी फसलों की MSP, गेहूं का दाम बढ़कर हुआ इतना

मोदी सरकार ने साल 2024-25 के लिए रबी की फसलों जैसे गेहूं और अन्य फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में वृद्धि की घोषणा की है। इसमें सरसों का दाम अब 5650 रुपये प्रत‍ि क्व‍िंटल होगा और गेहूं का दाम अब 2275 रुपये प्रत‍ि क्व‍िंटल होगा।

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किन फसलों की एमएसपी में कितनी बढ़ोतरी हुई

पीएम नरेंद्र मोदी के निर्देशन में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने रबी की फसलों के लिए MSP में वृद्धि को मंजूरी दी है। MSP में सर्वाधिक वृद्धि मसूर के लिए हुई है, जिसमें 425 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद, सरसों के मूल्य में 200 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की मंजूरी दी गई है। गेहूं और कुसुम के लिए भी 150-150 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को मंजूरी मिली है। चने के ल‍िए 105 रुपये प्रति क्विंटल और जौ के ल‍िए 115 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी को स्वीकृति दी गई है।

1 अप्रैल 2024 से प्रभावी होंगे ये रेट

रबी के सीजन की छह प्रमुख फसलों को गवर्नमेंट न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदती है, ज‍िनमें गेहूं, जौ, मसूर, सरसों, चना और कुसुम शाम‍िल हैं। अब गेहूं का सरकारी दाम 2275 रुपये प्रत‍ि क्व‍िंटल होगा। चना का मूल्य 5440, जौ का मूल्य 1850, मसूर का मूल्य 6425, कुसुम का मूल्य 5800 और सरसों का मूल्य 5650 रुपये प्रत‍ि क्व‍िंटल होगा। ये कीमतें 1 अप्रैल 2024 से लागू किया जाएगा,

केंद्रीय बजट 2018-19 के चलते बढ़ा MSP

रबी की फसलों की एमएसपी में यह बढ़ोत्तरी केंद्रीय बजट 2018-19 की घोषणा के मुताबिक हुई है, यह मूल्य कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) द्वारा तय किया जाता है। यह फसल में आई लागत से कम से कम 1.5 गुना होता है। इससे कृषकों को उनकी लागत से 50 फीसदी अधिक मुनाफा मिल जाता है। केंद्र सरकार का दावा है कि गेहूं की MSP उसकी लागत पर 102 % मुनाफे के साथ निर्धारित की गई है, और इसी तरह सरसों, चने, मसूर, जौ और कुसुम के लिए भी मुनाफे को ध्यान मे रखते हुए वृद्धि की गई है। इस वृद्धि के द्वारा क‍िसानों की आय में भी वृद्धि होने का अनुमान है

रबी की प्रमुख फसलें

रबी की प्रमुख फसल गेहूं होती है, जिसको बोने कि शुरुआत अक्टूबर के अंत में होती है, और अप्रैल में इसकी कटाई होती है। MSP किसानों के हितों का ध्यान रखने के लिए निश्चित की गई न्यूनतम धनराशि है, जिससे नीचे सरकारी खरीद एजेंसियां अनाज नहीं खरीद सकती है।

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