Wednesday, May 22, 2024
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नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में नहीं लगे होते LHB Coach तो 4 की जगह मरते 400 लोग, जाने LHB Coach में ऐसा क्या है खास

बिहार के बक्सर शहर में रघुनाथपुर रेलवे स्टेशन के पास एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी है, यहाँ बुधवार रात को दिल्ली के आनंद विहार टर्मिनल से असम के कामाख्या को जा रही नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस ट्रेन का एक्सीडेंट हो गया। परंतु इस ट्रेन में लिंके हॉफमैन बुश कोच (LHB Coach) लगे थे जिसकी वजह से सिर्फ चार लोगों की ही मौत हुई बाकी सभी यात्री इन स्पेशल कोच कि वजह से सुरक्षित बच गए।

Special Features Of LHB Coach
नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में नहीं लगे होते LHB Coach तो 400 से ज्यादा लोगों की जान जाती

अब आप सोच रहे होंगे लिंके हॉफमैन बुश कोच (एलएचबी कोच) में ऐसी क्या खासियत है जो इन्होंने बहुत सारे यात्रीगण की जान बचा ली। इस दुर्घटना में ट्रेन के 21 कोच पटरी से उतर गए थे, जिनमें से 2 कोच पलट गए, चार डगमगा गए, और बाकी पटरी पर ही इधर-उधर खड़े हो गए। रेल अधिकारियों के अनुसार, इस घटना में अभी तक चार लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि लगभग 71 यात्री घायल हैं, घायल यात्रियों का इलाज अलग-अलग हॉस्पिटल में चल रहा है, कुछ को छुट्टी भी मिल चुकी है।

क्या खास है लिंके हॉफमैन बुश कोच में – Special Features Of LHB Coach

नॉर्थ ईस्ट एक्सप्रेस में लगे लिंके हॉफमैन बुश कोच, पारंपरिक रेलवे कोच की तुलना में उंचे और हल्के होते हैं, जिससे ट्रेन को आसानी से तेज गति मे लाया जा सकता है। एलएचबी कोच वाली ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की गति तक चल सकती हैं। बिहार में घटित दुर्घटना के समय, ट्रेन की गति 128 किमी प्रति घंटा थी।

लिंके हॉफमैन बुश कोच की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि एलएचबी कोच एंटी-टेलिस्कोपिक होते हैं, इसका मतलब है कि दुर्घटना के समय रेलगाड़ी का कोई कोच या उसका कोई हिस्सा दूसरे कोच में नहीं घुसता है। इससे यात्रियों की सुरक्षा बढ़ जाती है, इस रेल दुर्घटना में जिन चार लोगों कि मौत हुई है उनमें से दो लोगों की जान झटका लगने पर ट्रेन से बाहर गिर जाने के कारण हुई है ये मां-बेटी गेट के पास लगे हुए बेसिन में हाथ धो रही थीं।

LHB Coach वाली ट्र्रेन में ‘सेंटर बफर कपलिंग सिस्टम’ भी इंस्टाल होता है, जो कि दुर्घटना के समय किसी कोच से अन्य कोच को होने वाले नुकसान को पारंपरिक कोच के मुकाबले कम कर देता है। कपलिंग सिस्टम एक ऐसा सिस्टम है जिससे ट्रेन के विभिन्न कोच एक-दूसरे से जुड़ पाते हैं।

एलएचबी कोच में सभी कोच में डिस्क ब्रेक लगे होते है, जिससे ट्रेन को बहुत अधिक गति मे होने पर भी रोका जा सकता है, इससे ट्रेन ड्राइवर को काफी मदद मिलती है। इन कोच में हाइड्रॉलिक सस्पेंशन भी लगे होते है, जिससे यात्रियों का सफर काफी आरामदायक हो जाता है। यह यात्रियों को झटकों की तकलीफ से तो बचाता ही है साथ ही ट्रेन चलने में होने वाले शोर को भी कम करता है।

किस देश ने बनाए है LHB Coach

एलएचबी कोच की तकनीक जर्मनी से आई है, यह जर्मन कंपनी ‘लिंके हॉफमैन बुश’ द्वारा डेवलप की गई थी, लेकिन अब इस कंपनी का नाम बदलकर ‘एल्सटॉम ट्रांसपोर्ट डॉइचलैन्ड’ हो गया है। परंतु इं कोच को इस कंपनी के पुराने नाम के अनुसार आमतौर पर ‘एलएचबी कोच’ ही कहा जाता है। सन 2000 में जर्मनी से 5 करोड़ रुपए के रेट से 24 कोच मंगाए गए थे और ट्रायल के तौर पर नई दिल्ली-लखनऊ शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में लगाए गए थे। परंतु अब इनका इस्तेमाल भारत की लगभग सभी रेलगाड़ियों में किया जा रहा है।

भारत मे कहाँ बनते है LHB Coach

इस तकनीकी के डिब्बों का भारत मे ट्रायल करते समय इनमें कई दिक्कतें आई। जिनको दूर करके वर्ष 2001 में इन्हें पुनःशताब्दी ट्रेन में ही लगाया गया। इसके बाद इन्हें भारत में भी विकसित किया जा रहा है। वर्तमान में एलएचबी कोच भारत के विभिन्न रेलवे कोच फैक्ट्रियों में बनाए जा रहे हैं, जैसे कि कपूरथला, चेन्नई और रायबरेली की इंटिग्रल कोच फैक्ट्रियों में। इन कोचों का उपयोग शताब्दी, राजधानी, दूरंतो, और अन्य प्रीमियम ट्रेनों में किया जा रहा है।

यह उन तकनीकों में से एक है जो यात्री सुरक्षा को बढ़ावा देता है। इस प्रौद्योगिकी की उपयोगिता को समझने के बाद, हम देखते हैं कि यह कैसे यात्रीगण की सुरक्षा को बढ़ावा देता है और रेलवे के प्रमुख प्रेमियम ट्रेनों में कैसे उपयोग मिलता है।

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