Saturday, April 13, 2024
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Coolant : कूलेंट से जुड़े प्रश्नों के उत्तर, जो हर वाहन चालक को जरूर पता होना चाहिए

एक इंजन को सही तरह से चलाने के लिए, उसके सभी पार्ट्स की देखभाल करना बहुत जरूरी होती है। जब हम किसी इंजन को चलाते हैं, तो उसमें हीट प्रोड्यूस होती है, जो कि उसके अंदर के सभी पार्ट्स को गर्म करती है। इसलिए हमें Engine को ठंडा करने की आवश्यकता होती है। जिसके लिए, हम एक Special Liquid का उपयोग करते हैं जिसे हम Coolant कहते हैं। आज इस आर्टिकल में हम कूलेंट के बारे में ही बात करने वाले है।

तो चलिए जान लेते हैं कि –

  • कूलेंट क्या होता है
  • कार या बाइक के इंजन के लिए कूलेंट क्यों ज़रूरी होता है?
  • यदि हम कूलेंट की जगह पानी डालते हैं तो क्या नुकसान हो सकते है?
  • अगर रास्ते में कूलेंट लीक हो जाए तो क्या हम पानी डाल कर गाड़ी चला सकते हैं?
  • कूलेंट कब बदलना चाहिए, अर्थात कितने किलोमीटर पर या कितने साल बाद बदलना चाहिए?
  • कूलेंट और पानी कितनी मात्रा में मिक्स करके डालना चाहिए?
  • यदि हम कूलेंट के साथ पानी मिक्स नहीं करते हैं तो क्या हो सकता है?
  • कैसे जाने कि कूलेंट ठीक है या नहीं?
  • क्या हम अलग-अलग कूलेंट को मिक्स करके इस्तेमाल कर सकते हैं?
  • कौन-सा कूलेंट किस गाड़ी में डालना उचित होगा?

यदि इस प्रकार के सवाल आपके मन में आते हैं तो आप सही आर्टिकल पर है। आपको इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना चाहिए।

Table Of Content

कूलेंट क्या है – Coolant In Hindi

Coolant एक विशेष धातुशोधित पदार्थ होता है जो इंजन को ठंडा रखने में मदद करता है तथा engine के अंदर रगड़ और अवशेष के जमाव को कम करता है। यह आमतौर पर वाहन के इंजन, इंडस्ट्रियल प्रॉसेस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, जनरेटर्स और अन्य उपकरणों के अंदर हीट को कंट्रोल करने के लिए उपयोग किया जाता है। यह इंजन की सेहत को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार या बाइक के इंजन के लिए कूलेंट क्यों ज़रूरी होता है – Why Coolant Is Necessary For Vehicles

जब हम कार या बाइक को देर तक चलाते है तो इसका इंजन काफ़ी गरम हो जाता है अब इंजन के अंदर प्रोड्यूस हुई हीट को ट्रांसफर कैसे किया जाए यह एक बड़ा प्रश्न बन जाता है क्योंकि अगर इस हीट को ट्रांसफर नहीं किया गया तो यह हीट इंजन में ही रहेगी, जिसके कारण इंजन के पार्ट्स पिघलने लगेंगे क्योंकि इंजन के अंदर ज़्यादातर पार्ट्स एल्युमीनियम के, रबर के या प्लास्टिक के बने होते हैं, जो कि कम हीट से ही Melt हो सकते है। इसके कारण गाड़ी के पिस्टन, स्लीप और हेड पिघल सकते है।

इसलिए, जो हीट कंबशन चेंबर में प्रोड्यूस हो रही है, उसे कहीं न कहीं ट्रांसफर करना बहुत जरूरी हो जाता है। इसके लिए कंपनियों ने दो तरह के इंजन बनाए है। एक एयर कूल्ड इंजन और एक लिक्विड कूल्ड इंजन।

कूलिंग सिस्टम के आधार पर इंजनों के प्रकार – Types Of Engines Based On cooling System in Hindi

1. एयर कूल्ड इंजन – Air Cooled Engine

एयर कूल्ड इंजन में इंजन को वायु की मदद से ठंडा किया जाता है परंतु वायु इंजन से कम हीट को ही ट्रांसफर कर पाती है। इसलिए जिन गाड़ियों में ज्यादा हीट प्रोड्यूस होती है उनमें लिक्विड कूल्ड इंजन दिया जाता है क्योंकि लिक्विड एयर की तुलना में ज्यादा हीट को ट्रांसफर कर सकता है।

2. लिक्विड कूल्ड इंजन – Liquid Cooled Engine

लिक्विड कूल्ड इंजन में कंबशन चेंबर में प्रोड्यूस हो रही हीट, इंजन के बाहर बनी जैकेट में आ जाती है जहां पर यह कूलेंट में ट्रांसफर हो जाती है। यह कूलेंट इंजन के अंदर सर्कूलेट होता रहता है और अब इंजन की हीट से गरम हो चुका यह कूलेंट सर्कूलेट होते हुए रेडिएटर तक पहुँच जाता है, जिसको रेडिएटर में लगे Coolant Fan द्वारा ठंडा कर दिया जाता है। अब यह ठंडा कूलेंट पुनः इंजन के बाहर बनी जैकेट में पहुँच जाता है। तथा यह प्रक्रिया पुनः शुरू हो जाती है।

आप जानते है कि Liquid Cooled Engine में प्रयोग होने वाला लिक्विड दो तरह का होता है – पानी और कूलेंट। परंतु ज्यादातर इंजनों में हम कूलेंट का ही प्रयोग करते है पानी का नहीं।

इंजनों में पानी की जगह कूलेंट का प्रयोग करने के प्रमुख कारण – Why Coolant is Used in Vehicle Instead Of Water

इंजन के अंदर पानी का प्रयोग न करके, कूलेंट का प्रयोग हम निम्न वजहों से करते है।

1. इंजन को जल्दी ठंडा करने के लिए – To Cool Engine Immediately

कूलेंट की जरूरत इसलिए होती है क्योंकि यह इंजन को पानी की तुलना में ज्यादा ठंडा रख सकता है। जिससे इंजन के प्रत्येक हिस्से में सही तापमान बना रहता है। जिससे हमारे इंजन के किसी पार्ट को नुकसान नहीं पहुँचता है।

2. रस्टिंग से सुरक्षा –  To Prevent Rusting

दूसरा काम है Coolant का, इंजन को रस्टिंग से बचाना। कूलेंट की वजह से इंजन के पार्ट्स में जंक नहीं लगती है जबकि यदि हम कूलेंट की जगह पर पानी का इस्तेमाल करें तो इंजन के पार्ट्स में जंक लगने का डर रहता है। रस्टिंग एक ऐसी समस्या है जो इंजन को बहुत नुकसान पहुंचा सकती है। रस्टिंग को वाटर पंप, एल्बो हेड ब्लॉक, रेडिएटर और हीटर कॉइल में देखा जा सकता है। अगर आपके इंजन में रस्टिंग हो जाती है, तो उसके अंदर अधिक हीट उत्पन्न होने लगती है जो कि इंजन को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए इंजनों को रस्टिंग से बचाने के लिए Coolant का प्रयोग करें।

3. टेंपरेचर रेंज – Wide Temperature Range

इन कारणों के अतिरिक्त इंजनों में कूलेंट के प्रयोग करने की मुख्य वजह इसकी वर्किंग टेंपरेचर रेंज का अधिक होना है। कूलेंट में यह खास बात होती है कि यह बहुत निम्न ताप पर भी जमता नहीं है साथ ही काफी उच्च ताप पर उबलता भी नहीं है। अतः यह हर मौसम में सही से काम करता है।

4. लिटिल फ्रीजिंग पॉइंट – Coolant Freezing Point

कूलेंट का फ्रीजिंग पॉइंट काफ़ी कम होता है जो Coolant को माइनस 30 डिग्री पर भी जमने से रोकता है। मान लो आपकी गाड़ी लद्दाख में खड़ी है जहां तापमान माइनस में रहता है। अगर आप Coolant की जगह पानी का इस्तेमाल करते हैं तो यह जम जाएगा और यदि यह जम जाता है तो आपके कूलिंग सिस्टम में समस्या होगी। इसलिए Coolant काफ़ी जरूरी है ताकि कूलिंग सिस्टम कम तापमान में भी काम करता रहें। अक्सर उन जगहों पर जहां तापमान काफ़ी कम रहता है Antifreeze Coolant यूज किए जाते है। जिनका फ्रीजिंग पॉइंट सामान्य कूलेंट से भी काफ़ी कम होता है।

5. बिग बॉयलिंग पॉइंट – Coolant Boiling Point

Coolant का बॉयलिंग प्वाइंट काफ़ी अधिक होता है इसलिए जब कूलेंट जल्दी उबलता नहीं है तो इसकी वाष्प भी नहीं बनती है अतः यह कम बॉयलिंग प्वाइंट वाले लिक्विड की तरह गैस बनकर अपने चेंबर से बाहर नहीं जा पाता है जिससे हमारा कूलेंट कम नहीं होता है अतः हमें गाड़ी में बार बार कूलेंट डालने की आवश्यकता नहीं होती है एक बार डाला गया कूलेंट सालों साल बरकरार रहता है।

गाड़ी में कूलेंट की जगह पानी डालने के नुकसान – Disadvantages Of Using Water In Cooling System

कूलेंट पानी से कई चीजों में बिलकुल भिन्न होता है। कूलेंट में कई ऐसे तत्व होते हैं जो कि पानी से बिल्कुल भिन्न होते हैं। इसलिए, गाड़ी में कूलेंट की जगह पानी डालने से इंजन में कुछ नुकसान हो सकते हैं जैसे कि:

1. कम हीट का ट्रांसफर – Low Heat Transfer

कूलेंट की जगह पानी के उपयोग से इंजन की हीट कम मात्रा में ही ट्रांसफर हो पाती है इसलिए इंजन जल्दी ठंडा नहीं हो पाता है और इंजन के अधिक गर्म होने पर आप गाड़ी को लगातार प्रयोग नहीं कर पाते है।

2. रेडिएटर में ब्लॉकेज – Blockage In The Radiator

पानी जल्दी जल जाता है। जिस कारण, रेडिएटर में ठोस पदार्थ जमा हो सकते हैं, जो रेडिएटर में ब्लॉकेज का कारण बन सकते हैं। यह आपकी गाड़ी के इंजन के लिए खतरनाक हो सकता है। आपकी गाड़ी का कूलिंग सिस्टम गाड़ी के इंजन को ठंडा रखने में असफल हो सकता है।

3. कॉरोशन की समस्या – Corrosion Problem In Engine

गाड़ी में कूलेंट की जगह पानी डालने से गाड़ी के इंजन में तेजी से कॉरोशन होता है। पानी का इस्तेमाल करने से वाटर पंप, रेडिएटर, हीटर कोर, सिलेंडर हेड आदि पर कॉरोशन का खतरा बढ़ जाता है। इससे ये पार्ट्स ठीक से काम नहीं करते हैं और आपकी गाड़ी के इंजन को भी नुकसान हो सकता है जिससे गाड़ी के इंजन की आयु कम हो सकती है।

4. स्लज जमा होने का कारण : Cause of Sludge In Engine

पानी कूलेंट के मुकाबले कम श्यानता वाला (Less Viscous) होता है जिससे इंजन के अंदर इसका सर्कुलेशन थोड़ा बहुत बदल जाता है। अधिक पानी इंजन के अंदर स्लज जमा होने का कारण बनता है, जिससे पानी का सर्कुलेशन बंद हो जाता है, और गाड़ी ओबरहीट होने लगती है। यदि यह चार पाँच बार सही से ओबरहीट हो जाती हैं तो, गाड़ी का इंजन सीज हो सकता है।

अतः गाड़ी में कूलेंट की जगह पानी डालने से बचना चाहिए और गाड़ी को समय-समय पर सर्विस करवाना चाहिए ताकि इंजन ठीक बना रहे और गाड़ी लंबे समय तक अच्छी तरह से काम कर सके। अगर आपकी गाड़ी में कूलेंट की जगह पानी डालने से जुड़ी कोई समस्या हो तो आपको गाड़ी को तुरंत सर्विस सेंटर में ले जाना चाहिए।

कितना कूलेंट और कितना पानी यूज़ करें – Coolant And Water Ratio In Hindi

अक्सर लोगों के मन में यह प्रश्न होता है कि Coolant Fill करते समय उनको कितना कूलेंट और कितना पानी यूज़ करना चाहिए तो इसे ऐसे समझ सकते है यदि आप हैवी ड्यूटी कूलेंट को प्रयोग कर रहे है और आपकी गाड़ी में 4 लीटर की कैपेसिटी है तो आपको अपनी गाड़ी के लिए 2 लीटर कूलेंट और 2 लीटर पानी को मिक्स करके उपयोग करना चाहिए। अर्थात कूलेंट और पानी के मिश्रण को, आप 50-50 के रेशियो में रख सकते हैं।

परंतु यदि आप रेडी टू यूज़ कूलेंट का प्रयोग कर रहे है तो आपको इसमें पानी मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है। इसलिए इसे आप 100% Pure मतलब ऐसे ही उपयोग कर सकते हैं।

परंतु अगर आपकी गाड़ी बहुत ज्यादा हीट उत्पन्न करती है तो आपको हैवी ड्यूटी कूलेंट का उपयोग करना चाहिए। हालांकि Heavy Duty Coolant Price कुछ ज्यादा होता है लेकिन इससे आपकी गाड़ी को ज्यादा ठंडा रखने में मदद मिलती है।

जब आप कूलेंट और पानी का मिश्रण तैयार करते हैं और इसे अपनी गाड़ी में डालते हैं। तो आपके लिए एक और बात ध्यान रखना चाहिए कि आप 50-50 के रेशियो में, अपनी गाड़ी की कैपेसिटी के हिसाब से ही कूलेंट और पानी का मिश्रण बनाएं और गाड़ी में कूलेंट और पानी के मिश्रण को धीरे-धीरे डालें, जिससे ये अच्छे से मिक्स हो सके।

कूलेंट को कब चेंज करना चाहिए – When To Change Coolant

कूलेंट को आपको समय के अनुसार या गाड़ी के किलोमील देखकर चेंज कराना चाहिए। आपको आपकी गाड़ी के साथ प्राप्त हुई ऑनर मैनुअल में देखना चाहिए कि उसमें कितने किमी पर कूलेंट को चेंज करने की एडवाइस दी गई है। कुछ गाड़ियों में ये 50000 किमी तथा कुछ में यह रेंज 20000 किमी की दी हुई होती है।

अब आप अपने मीटर की जांच करें और देखें कि आपके मीटर में कितने किलोमीटर दिखा रहा हैं। अगर आपने पिछली बार कूलेंट को 20,000 किलोमीटर पर चेंज किया था तो आपको 20000 किमी से 50000 किमी के अंदर ही Coolant को चेंज कर देना चाहिए। यदि आप समय की बात करते हैं, तो आपको 3 साल में एक बार Coolant को जरूर बदल लेना चाहिए।

यह आपके वाहन की दीर्घावधि सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए, एक नियमित अंतराल पर Coolant को जरूर चेंज कर लेना चाहिए ताकि यह गाड़ी को जरूरी सुरक्षा प्रदान करता रह सके। इससे आपके वाहन के इंजन का तापमान सही रहेगा और उसकी हेल्थ भी ठीक रहेगी।


कैसे जाने कि कूलेंट ठीक है या नहीं – Coolant Test In Hindi

Coolant को चेक करने के लिए, सबसे पहले कूलेंट के कलर को चेक कर सकते हैं। यदि कूलेंट खराब है, तो उसका कलर भी फेड होगा, यह कुछ पीला पीला सा पड़ जाता है या फिर इसमें जंग लगी हुई दिखेगी। इसके लिए आप अपनी गाड़ी के रेडिएटर या एक्सपेंशन टैंक की जाँच कर सकते हैं। आप रेडिएटर के ढक्कन को खोलकर भी कूलेंट की जाँच कर सकते हैं।

अगर आपको कूलेंट की जाँच करने के लिए टेस्टर मशीन की आवश्यकता है, तो आप कूलेंट टेस्टर मशीन का भी उपयोग कर सकते हैं। टेस्टर मशीन 35 पॉइंट के टारगेट के रूप में काम करती है जो कूलेंट की गुणवत्ता को निर्धारित करते है। यदि टेस्टर मशीन 35 से कम या 35 से अधिक पॉइंट बताती है, तो आप जान सकते हैं कि कूलेंट सही है या नहीं।

क्या हम अलग-अलग कंपनियों के कूलेंट को मिक्स कर सकते हैं – Coolant Mixing In Hindi

जी हाँ, आप अलग-अलग कंपनियों के कूलेंट को मिलाकर इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, आपको याद रखना चाहिए कि जिस कलर का आपका पुराना कूलेंट है, नया कूलेंट भी आपको उसी कलर का मिक्स करना चाहिए। यदि आपकी गाड़ी में हरा कूलेंट है, तो चाहे वह कैस्ट्रोल का हो, या किसी अन्य कंपनी का हो, आप उसमें किसी भी कम्पनी का हरा कूलेंट मिला सकते हैं। लेकिन अगर आप लाल कूलेंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपको उसमें किसी भी कंपनी का लाल रंग का कूलेंट ही मिक्स करना चाहिए। अलग-अलग कंपनियों के एक ही रंग के कूलेंट को मिलाने से कोई दिक्कत नहीं होगी, परंतु एक ही कम्पनी के अलग-अलग कलर के कूलेंट को मिक्स करने से भी दिक्कत हो सकती है।

कूलेंट के प्रयोग से जुड़ी अन्य ध्यान रखने योग्य बातें

1. समय पर कूलेंट चेंज करना

जब भी आप अपनी गाड़ी का मेंटेनेंस करते हैं, कूलैंट को New coolant से बदलना चाहिए। कूलेंट को समय-समय पर बदलना इसलिए भी आवश्यक होता है ताकि इसके माध्यम से इंजन में जमा हुए अवशेष पदार्थ निकाले जा सकें। इससे इंजन की उम्र लंबी होती है।

2. कूलेंट का लेवल सही रखना

एक अन्य बात जो ध्यान में रखनी चाहिए है कि कूलेंट का लेवल हमेशा सही होना चाहिए। जब आप अपनी गाड़ी के इंजन को चलाते हैं, तो कूलैंट इंजन में घूमता है और इंजन को ठंडा रखता है। यदि coolant Level Down होता है, तो इंजन गर्म हो सकता है जिससे उसे नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, नियमित अंतराल पर कूलेंट लेवल की जांच करना चाहिए और यदि आवश्यक हो तो कूलैंट को भरा लेना चाहिए।

3. सही कूलेंट का प्रयोग

कूलेंट कई ऐसे तत्वों से मिलकर बना होता है जो इंजन की सेहत के लिए बेहद आवश्यक होते हैं। इसलिए कूलेंट के लिए सही मिश्रण का उपयोग किया जाना चाहिए। यदि आप गलत मिश्रण का उपयोग करते हैं, तो इंजन में कॉरोशन या अन्य समस्याएं हो सकती हैं जो उसे नुकसान पहुंचा सकती हैं।

4. समय समय पर कूलिंग सिस्टम की जांच

इंजन के कूलिंग सिस्टम को समय-समय पर चेक करा लेना चाहिए ताकि इसमें कोई भी खराबी आने पर जल्द से जल्द उसका पता चल सके और उसे ठीक कराया जा सके।

FAQ’s Related To Coolant

अगर रास्ते में कूलेंट लीक हो जाता है तो क्या वाहन को पानी डाल के चलाया जा सकता है?

यदि आप रास्ते में कूलेंट लीक होने के कारण पानी डालकर वाहन को चलाते हैं तो यह सिर्फ एक अस्थाई मतलब कुछ देर की ही राहत होगी। क्योंकि वैसे तो पानी Coolant के समान ठंडा होता है और उससे जल्दी कोई दिक्कत नहीं होती है। लेकिन अगर आप कई किलोमीटर तक ऐसे ही चलते जाते हैं। तो आपकी गाड़ी ओवरहीट कर सकती है। और आपका पानी भाप बनकर खत्म हो जाएगा, इसलिए रास्ते में जहां भी आपको कूलेंट मिल जाए, आपको उसे भरा लेना चाहिए। क्योंकि अगर आप इंजन के लिए सही कूलेंट का उपयोग नहीं करते हैं तो यह आपके इंजन के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।

क्या गाड़ी में कूलेंट की जगह पानी का प्रयोग कर सकते है
पानी डालकर चलाना सही नहीं होता है। क्योंकि कूलेंट विशेष रूप से कई रसायनों का मिश्रण होता है जो इंजन के लिए आवश्यक होते है। अगर इनमे किसी भी प्रकार की कमी की जाती है तो इंजन की परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है फलत: इंजन की उम्र कम हो जाती है।

यदि हम कूलेंट के साथ पानी मिक्स नहीं करते हैं तो क्या हो सकता है?

हालांकि कूलेंट और पानी का मिश्रण बनाने में आपके कम रुपए खर्च होते है। जैसे यदि एक लीटर कूलेंट 300 रुपए का है तो इतने रूपए में आप दो लीटर कूलेंट तैयार कर सकते है। आपको सिर्फ इसमें 1 लीटर पानी मिलाना होगा और आपका मिश्रण तैयार हो जाएगा। परंतु अगर आप कूलेंट के लिए अधिक रुपए खर्च कर सकते है तो आप हैवी ड्यूटी कूलेंट को भी बिना पानी मिलाए प्रयोग कर सकते है। मतलब इसे भी आप 100% शुद्ध रूप में प्रयोग कर सकते हैं।

कूलेंट को बदलना क्यों आवश्यक होता है
इंजन की सही फंक्शनिंग के लिए समय समय पर कूलेंट को बदलना बहुत आवश्यक होता है। लेकिन आपको ध्यान देना चाहिए कि जब आप कूलेंट को बदलते हैं तो उसे सावधानीपूर्वक फिल कराना चाहिए। जिससे इंजन की ठंडक को बनाए रखा जा सके।

Antifreeze Coolant क्या होते है?
वे कूलेंट जिनका फ्रीजिंग पॉइंट सामान्य कूलेंट से भी काफ़ी कम होता है। Antifreeze Coolant कहलाते है।

कौन-सा कूलेंट किस गाड़ी में डालना उचित होगा?

किस गाड़ी में हम कौन सा कूलेंट यूज़ कर सकते हैं यह गाड़ी की Owner Manual में बताया गया होता है। इसके अतिरिक्त आप गाड़ी के सर्विस एडवाइसर से भी अपनी गाड़ी के लिए सही कूलेंट के बारे में पता कर सकते है। हर कलर के कूलेंट में अलग अलग रसायनों का प्रयोग होता है। कलर और कम्पनी के आधार पर यहाँ हमने कुछ अच्छे कूलेंट के नाम दे रखे हैं। जिनको आप क्लिक करके ख़रीद भी सकते है।

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तो आप जान गए होंगे कूलेंट का उपयोग करके बहुत सी समस्याओं से बचा जा सकता है। यह आपके इंजन को ठंडा रखता है, इंजन के अंदर कॉरोशन और रस्टिंग को रोकता है, और इंजन की उम्र बढ़ाता है। इसलिए, इंजन के लिए Coolant का इस्तेमाल बहुत ज़रूरी है। कूलेंट से जुड़े सभी प्रश्नों के जवाब आपको मिल गये होंगे, यदि इनके अतिरिक्त भी आपके मन में कूलेंट से संबंधित कोई प्रश्न है, तो आप उसे कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं। हमें उसके बारे में बताने में खुशी होगी।

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